यदि भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होता है तो क्या बदलाव आएगा।

     
      केंद्र सरकार द्वारा जनता से समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड से संबंधित लोगों से अपनी राय मांगी है। जिससे लेकर पूरे देश में चर्चा शुरू हो गई है। किसी ने उसके समर्थन में, किसी ने उसके विरोध करना शुरू कर दिया है। आख़िर यदि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होता है, तो क्या बदलाव आ सकता हैं।

1. शादी की उम्र: यूसीसी टेम्पलेट में सभी धर्मो की लड़कियों की विवाह योग्य उम्र एक समान करने का प्रस्ताव है। अभी कई धर्मो के पर्सनल लॉ और कई अनुसूचित जनजातियों में लड़कियों की उम्र 18 से कम हैं। अगर यूसीसी लागू होता है तो सभी लड़कियों की विवाह उम्र बढ़ जाएगी, जिससे विवाह से पहले ग्रेजुएट कर सके।

2. विवाह रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: भारत में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और कई अन्य धर्म में रीति- रिवाजों से होने वाले विवाह को रजिस्टर करना अनिवार्य नहीं है। लोग तभी रजिस्ट्रेशन कर आते हैं, जब उन्हें पति - पत्नी के रुप में विदेश में जाना हो। यूसीसी में सुझाव है कि सभी धर्मों में विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इसके बिना सरकारी सुविधा का लाभ नहीं कया जाएगा।

3. बहु विवाह पर रोक: मौजूदा समय में कई धर्म और समुदाय के पर्सनल लोन बहु विवाह को मान्यता देते हैं खासतौर पर मुस्लिम समुदाय में तीन विवाह करने की अनुमति है। यूसीसी के लागू होने पर बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।

4. तलाक के नियम: तलाक लेने के लिए पत्नी और पति के बीच कई ऐसे आधार हैं, जो दोनों के लिए अलग-अलग हैं। यूसीसी में सुझाव है कि पत्नी व पति के लिए तलाक के समान आधार लागू होने चाहिए।

5. भरण पोषण: पति की मौत के बाद मुआवजा राशि मिलने के बाद पत्नी दूसरा विवाह कर लेती हैं, और मृतक के माता-पिता भी बेसहारा रह जाते हैं। यह यूसीसी का सुझाव है कि अगर मुआवजा विधवा पत्नी को दिया जाता है, तो उन्हें सास-ससुर के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी उस पर भी होगी। अगर वह दूसरा विवाह करती हैं तो मुआवजा मृतक के बूढ़े माता-पिता को दिया जाएगा।

6. गोद लेने का अधिकार: कुछ धर्मों के पर्सनल लॉ अभी देश में महिलाओं को बच्चों को लेने से रोकते हैं। यूसीसी के कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं को भी बच्चा गोद लेने का अधिकार मिल जाएगा।

7. बच्चों की देखरेख: माता पिता की मौत के बाद कई लालची रिश्तेदार बच्चों के अभिभावक बन जाते हैं। वे संपत्ति हड़प पर बच्चों की बेसहारा छोड़ देते हैं। यूसीसी में सुझाव है कि अनाथ बच्चों की गार्जियनशिप की प्रक्रिया को आसान व मजबूत बनाएं।

8. उत्तराधिकार कानून: कई धर्मों में लड़कियों को संपत्ति में बराबर का अधिकार हासिल नहीं है। यूसीसी में सभी को समान अधिकार का सुझाव है। अगर पारसी लड़की गैर पारसी से विवाह करती हैं, तो उससे सभी संपत्ति व अन्य हक छीन लिए जाते हैं। सभी हिंदू लड़कियों को संपत्ति में बराबर की हिस्सेदारी मिलेगी। अन्य धर्मों में उत्तराधिकार कानूनों में बदलाव होगा।

9. जनसंख्या नियंत्रण: यूसीसी में जनसंख्या नियंत्रण का भी सुझाव है।  भारत में बच्चों की संख्या के संदर्भ में कोई कानून नहीं है।  उस धर्मों के पर्सनल लॉ बोर्ड बच्चों की संख्या सीमित करने का विरोध करते हैं। यूसीसी का सुझाव है कि बच्चे पैदा करने की संख्या सीमित की जाए, नियम तोड़ने पर सरकारी सुविधाओं के लाभ से वंचित किया जाए।जिससे कि जनसंख्या विस्फोट पर रोका जा सकता है।

10. लिव इन रिलेशनशिप: अभी देश के में लिव-इन रिलेशनशिप अपराध नहीं है। लेकिन यूसीसी के टेम्पलेट में इसके रेगुलेशन का सुझाव है। अगर यूसीसी कानून बनाता है, तो रिलेशनशिप में रहने वालों को इनका डिक्लेरेशन करना अनिवार्य होगा। इनकी सूचना लड़के और लड़की दोनों के माता-पिता को भी की जाएगी।

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