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प्रमुख विचारक जॉन लॉक के विचार ( John locks )

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   जॉन लॉक ( 1632- 1704 ई) 17 वी शताब्दी का प्रसिद्ध अंग्रेज विचारक था। उसे उदारवाद का जनक माना जाता है। जिनके विचार अमेरिका संविधान के प्रस्तावना तथा फ्रांसीसी क्रांति के मानव अधिकारों की घोषणा में उनके विचार देखे जा सकते है। आइए संक्षिप्त में जानते हैं।                        ( चित्र : जॉन लॉक ) 1. जॉन लॉक में जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार को मानवता प्राकृतिक अधिकार माना । मनुष्य इन्हीं अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य का निर्माण करता है। 2. उन्होंने राजा के देवी अधिकार के सिद्धांत को खंडन किया। सरकार स्वयं व्यक्ति के निष्ठा से बंधी होती हैं। राजा का कर्तव्य होता है प्रजा की सेवा करना। 3. लॉक ने राज्य के संबंध में सीमित संप्रभुता का सिद्धांत प्रतिपादित किया। सरकार का स्वरूप चाहे जनतांत्रिक हो या राजतांत्रिक उसके अधिकार सीमित होते हैं। कोई भी सरकार व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों जीवन, स्वतंत्रता, समानता और संपत्ति का उल्लंघन नहीं कर सकती। 4. लॉक के विचारों का प्रभाव अमेरिका संविधान की प्रस्तावना ...

रूस की क्रांति होने के क्या कारण थे? ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ।What were the reasons for the Russian Revolution? with historical background.

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              1917 की रूस की क्रांति 20वीं सदी के विश्व इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना रही। 1789 ईस्वी में फ्रांस की राज्य क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और भ्रातत्व की भावना का प्रचार कर यूरोप के जनजीवन को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। रूस की क्रांति ने न सिर्फ रूस और यूरोप को प्रभावित किया वरन विश्व के अनेक देशों पर गहरा प्रभाव डाला। रूसी क्रांति की व्यापकता अब तक की सभी राजनीतिक घटनाओं की तुलना में बहुत विस्तृत थी। इसमें केवल निरंकुश, एकतंत्री, स्वेच्छाचारी, जारशाही ही शासन का ही अंत नहीं किया बल्कि कुलीन जमीदारों, सामंतो, पूंजीपतियों आदि की आर्थिक और सामाजिक सत्ता को समाप्त करने करते हुए विश्व में प्रथम मजदूर और किसान की सत्ता स्थापित की। मार्क्स द्वारा प्रतिपादित वैज्ञानिक समाजवाद की विचारधारा को मूर्त रूप प्रथम बार रूसी क्रांति ने ही प्रदान किया। इस क्रांति ने समाजवादी व्यवस्था को स्थापित कर स्वयं को इस व्यवस्था के जनक के रूप में स्थापित किया। यह विचारधारा 1917 के पश्चात इतनी शक्तिशाली हो गई कि 1950 तक लगभग आधा विश्व इसके अंतर्गत आ चुका ...

आखिर क्यों कहा जाता है इटली को पुनः जागरण की जन्मस्थली ? (Why is Italy called the birthplace of Renaissance? )

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 पुनर्जागरण का अर्थ है, पुनः जगाना। इसका अर्थ मानव का बौद्धिक चेतना, मानवतावाद ( धर्म केंद्रित से हटाकर मानव केंद्रित), का पुनः उत्थान से है। यह मात्र एक या दो वर्षो में घटित घटना नहीं है, इसका एक लंबा समय (1350ई - 1550ई) रहा है। आखिर क्या कारण रहा होगा कि उसकी शुरुआत इटली से हुई है,और इटली को पुनः जागरण का जन्मदाता कहने के पीछे क्या  कारण रहा होगा। आइए जानते है। • भौगोलिक दृष्टि से इटली भूमाध्यसागर तट पर स्थित है, जो अरब साम्राज्य और पश्चिमी यूरोप का प्रमुख व्यापारिक सेतु रहा है, इस कारण यह व्यापार - वाणिज्य नगरों नेपल्स, फ्लोरस, वेनिस तथा मिलन जैसे नगरों का उदय हुआ। व्यापारिक केंद्र होने से भौतिक संपन्नता आई और इस संपन्नता ने सांस्कृतिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया।  • व्यापारिक नगरों के विकास के कारण नगरों में संग्रहालयों, सार्वजनिक पुस्तकालयों, नाट्यशालाओं की स्थापना संभव हुई। जो ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी संस्थाओं की विकास की क्षमता नहीं होती है।  • इटली की समृद्धि से व्यापारिक मध्यम वर्ग का उदय हुआ।  इससे सामंतों और पोप की प्रवाह करना बंद कर दि...