Posts

Showing posts with the label uniform civil code

यदि भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होता है तो क्या बदलाव आएगा।

Image
            केंद्र सरकार द्वारा जनता से समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड से संबंधित लोगों से अपनी राय मांगी है। जिससे लेकर पूरे देश में चर्चा शुरू हो गई है। किसी ने उसके समर्थन में, किसी ने उसके विरोध करना शुरू कर दिया है। आख़िर यदि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होता है, तो क्या बदलाव आ सकता हैं। 1 . शादी की उम्र: यूसीसी टेम्पलेट में सभी धर्मो की लड़कियों की विवाह योग्य उम्र एक समान करने का प्रस्ताव है। अभी कई धर्मो के पर्सनल लॉ और कई अनुसूचित जनजातियों में लड़कियों की उम्र 18 से कम हैं। अगर यूसीसी लागू होता है तो सभी लड़कियों की विवाह उम्र बढ़ जाएगी, जिससे विवाह से पहले ग्रेजुएट कर सके। 2. विवाह रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: भारत में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और कई अन्य धर्म में रीति- रिवाजों से होने वाले विवाह को रजिस्टर करना अनिवार्य नहीं है। लोग तभी रजिस्ट्रेशन कर आते हैं, जब उन्हें पति - पत्नी के रुप में विदेश में जाना हो। यूसीसी में सुझाव है कि सभी धर्मों में विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इसके बिना सरकारी सुविधा का ल...

आजादी के 75वा अमृत महोत्सव के बाद भी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना एक बहस का मुद्दा है।

Image
               भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। इस देश की विविधता मात्र भू-भाग तक ही सीमित नहीं है। भारत विश्व का सबसे बड़ा धर्म विविधता वाला देश भी है। यह हिंदू के साथ मुस्लिम, जैन, बौद्ध, ईसाई तथा पारसी भी सौहार्दपूर्ण रहते है।  आज भारत आजादी का 75वा अमृत महोत्सव मना रहा है। परंतु आज भी वही औपनिवेशिक ब्रिटिशकालीन धार्मिक  आडंबरयुक्त धार्मिक पर्सनल लॉ मौजूद है। जैसे -  मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937” हिंदुओ का पर्सनल लॉ आदि।   भारत के आजादी के बाद भी कई सामाजिक-धार्मिक सुधार के कई कानून लाए। जैसे - बाल विवाह विरुद्ध कानून, विधवा विवाह कानून, बहुविवाह निषेध कानून तथा हाल में ही तीन तलाक़ के विरुद्ध कानून बनाए गए। परंतु धार्मिक पर्सनल कानून के कारण संवैधानिक/ विधि कानून निष्प्रभावी है। आज आवश्कता है सभी सभी धर्मो पर एक समान कानून प्रभावी हो। हमारे  कानून निर्माताओं ने संविधान ने बकायदा संविधान के भाग - 4 में नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद - 44  में समान नागरिक संहिता को समाहित कि...