आखिर क्यों कहा जाता है इटली को पुनः जागरण की जन्मस्थली ? (Why is Italy called the birthplace of Renaissance? )

 पुनर्जागरण का अर्थ है, पुनः जगाना। इसका अर्थ मानव का बौद्धिक चेतना, मानवतावाद ( धर्म केंद्रित से हटाकर मानव केंद्रित), का पुनः उत्थान से है। यह मात्र एक या दो वर्षो में घटित घटना नहीं है, इसका एक लंबा समय (1350ई - 1550ई) रहा है। आखिर क्या कारण रहा होगा कि उसकी शुरुआत इटली से हुई है,और इटली को पुनः जागरण का जन्मदाता कहने के पीछे क्या  कारण रहा होगा। आइए जानते है।





• भौगोलिक दृष्टि से इटली भूमाध्यसागर तट पर स्थित है, जो अरब साम्राज्य और पश्चिमी यूरोप का प्रमुख व्यापारिक सेतु रहा है, इस कारण यह व्यापार - वाणिज्य नगरों नेपल्स, फ्लोरस, वेनिस तथा मिलन जैसे नगरों का उदय हुआ। व्यापारिक केंद्र होने से भौतिक संपन्नता आई और इस संपन्नता ने सांस्कृतिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया। 


• व्यापारिक नगरों के विकास के कारण नगरों में संग्रहालयों, सार्वजनिक पुस्तकालयों, नाट्यशालाओं की स्थापना संभव हुई। जो ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी संस्थाओं की विकास की क्षमता नहीं होती है। 


• इटली की समृद्धि से व्यापारिक मध्यम वर्ग का उदय हुआ।  इससे सामंतों और पोप की प्रवाह करना बंद कर दिया। समृद्धि व्यापारिक वर्ग ने साहित्यकारों, कलाकारों को प्रश्रय दिया। इसमें पेटार्क, एंजेलो, लियोनार्दो आदि प्रमुख थे  इन विद्वानों ने पुनर्जागरण चेतना का प्रचार किया। 


• इटली में व्यापार के विकास के साथ नई प्रकार की शिक्षा का विकास हुआ  जिसमें व्यावसायिक ज्ञान, भौगोलिक ज्ञान आदि को महत्व दिया गया। जबकि ऊपरी यूरोपीय विश्वविद्यालयों में धर्मशास्त्रों का अध्ययन पर ही विशेष बल दिया गया था। रोम विधि, चिकित्सा जैसे धर्मनिरपेक्ष उपयोगी शिक्षा के कारण इटली में पुनर्जागरण कालीन चेतना का विकास हुआ।



• प्राचीन रोम साम्राज्य के अवशेष इटली में विद्यमान थे। क्योंकि वह इटली का एक प्रमुख नगर था। वस्तूत इटालियन नजर प्राचीन गौरवपूर्ण साम्राज्य के अवशिष्ट चिह्न थे। जो इतालवी मानस पर गहरा प्रभाव डालते थे। यही वजह है कि प्राचीन रोम संस्कृति पुनर्जागरण का प्रेरणा स्त्रोत बन जिसे दांते की रचनाओं में देखा जा सकता है।



• इटली में रोम के ' वेटिकन' स्थान पर पॉप का निवास था जो ईसाई जगत का प्रधान था।  कुछ पुनर्जागरण की भावना से युक्त होकर विद्वानों, कला एवं साहित्य को संरक्षण प्रदान किए उनमें एक प्रमुख था - पोप निकोलस पंचम (1447ई - 1455ई) जिसने वेटिकन पुस्तकालय की स्थापना की। 


• राजनीतिक दृष्टि से भी इटली पुनर्जागरण के लिए उपयुक्त था क्योंकि उत्तरी इटली में स्वतंत्र नगर राज्यों का विकास हो गया था और सामंत प्रथा भी अधिक दृढ़ नहीं थी। फलत: उदारवादी एवं स्वतंत्र विचारों के विकास का माहौल मौजूद था। 


• कुस्तुनतुनिया यूनानी विद्वानों का प्रमुख केंद्र था 1453 ई  में वहां तुर्कों का आधिपत्य हो जाने से यह विद्वान वहां से अपने प्राचीन ग्रंथ और महत्वपूर्ण पुरातात्विक सामग्री लेकर भागे और सर्वप्रथम इटावली नगरों में प्रश्रय लिया। इन नवागत विद्वानों की संख्या इतनी अधिक थी कि लगता था कि "यूनान का पतन नहीं अपितु उनका इटली में प्रवजन हो गया।"इनमें से अनेक विद्वान इटली के स्कूल तथा विश्वविद्यालयों में शिक्षक नियुक्त हुए और इन वर्ग ने नवीन चेतना के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 


• • रोम प्राचीन कालीन सभ्य नगर रहा है, साथ ही बौद्धिक चिंतकों की जन्म स्थली रही है जैसे - दांते, गियातो, 

पेटार्क, लियोनार्दो आदि।

Comments

Popular posts from this blog

स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था क्या है? स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था की विशेषताएं, उद्देश्य, लाभ और हानियां!

प्रमुख विचारक जॉन लॉक के विचार ( John locks )

मंदिर वास्तुकला की नागर शैली