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भारत में समाजवाद का इतिहास (History of Socialism in India)

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• जानेंगे कैसे भारत में समाजवाद की शुरुआत हुई? • समाजवाद भारतीय इतिहास को किस प्रकार प्रभावित किया ।     प्रथम विश्व युद्ध के पहले लगभग सभी देशों में  पूंजीवादी व्यवस्था का अधिक बोलबाला था। परंतु प्रथम विश्व के समाप्ति के पश्चात रूसी क्रांति (1917)  में उपजी नई कम्युनिस्ट विचारधारा ने साम्राज्यवादी राष्ट्रों के विरुद्ध विभिन्न उपनिवेशी राष्ट्रों (लेटिन अमेरिका,अफ्रीका तथा एशियाई देशों) में एक नई स्वतंत्रता की राष्ट्रवादी चेतना का विकास किया। इसी  कम्युनिस्ट विचारधारा की उपज भारत में समाजवादी विचारधारा का विकास हुआ। जो इतिहास के लेकर वर्तमान तक भारत में समाजवादी विचारधारा देख सकते है।       सोवियत संघ द्वारा कम्युनिस्ट इंटरनेशनल द्वारा उपनिवेश देशों में साम्यवाद का प्रचार के कारण इसका प्रचार भारत में भी हुआ।  सन 1927 तक भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में समाजवाद विचार का बहुत तेजी से विकास हुआ। उस समय भारत में राष्ट्रीय कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी हुआ करती थी। राजनीतिक दृष्टि से इस शक्ति की अभिव्यक्ति कांग्रेस के अंदर एक वामपंथ के रुपए के...

आखिर क्यों कहा जाता है इटली को पुनः जागरण की जन्मस्थली ? (Why is Italy called the birthplace of Renaissance? )

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 पुनर्जागरण का अर्थ है, पुनः जगाना। इसका अर्थ मानव का बौद्धिक चेतना, मानवतावाद ( धर्म केंद्रित से हटाकर मानव केंद्रित), का पुनः उत्थान से है। यह मात्र एक या दो वर्षो में घटित घटना नहीं है, इसका एक लंबा समय (1350ई - 1550ई) रहा है। आखिर क्या कारण रहा होगा कि उसकी शुरुआत इटली से हुई है,और इटली को पुनः जागरण का जन्मदाता कहने के पीछे क्या  कारण रहा होगा। आइए जानते है। • भौगोलिक दृष्टि से इटली भूमाध्यसागर तट पर स्थित है, जो अरब साम्राज्य और पश्चिमी यूरोप का प्रमुख व्यापारिक सेतु रहा है, इस कारण यह व्यापार - वाणिज्य नगरों नेपल्स, फ्लोरस, वेनिस तथा मिलन जैसे नगरों का उदय हुआ। व्यापारिक केंद्र होने से भौतिक संपन्नता आई और इस संपन्नता ने सांस्कृतिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया।  • व्यापारिक नगरों के विकास के कारण नगरों में संग्रहालयों, सार्वजनिक पुस्तकालयों, नाट्यशालाओं की स्थापना संभव हुई। जो ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी संस्थाओं की विकास की क्षमता नहीं होती है।  • इटली की समृद्धि से व्यापारिक मध्यम वर्ग का उदय हुआ।  इससे सामंतों और पोप की प्रवाह करना बंद कर दि...

भारत को नाटो प्लस से क्यों दूर रहना चाहिए ?

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• NATO PLUS आखिर है क्या? • भारत को इसमें शामिल क्यों नहीं होना चाहिए!           NATO PLUS  एक सुरक्षा व्यवस्था है जो 31 NATO सदस्य राष्ट्रों के अतिरिक्त और 5 गठबंधन राष्ट्रो ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, इस्राइल और दक्षिण कोरिया को वैश्विक रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए साथ लाती है।         भारत NATO PLUS ka सदस्य बनने   मतलब रूस के साथ अपने संबंध खराब करना। भारत कभी नहीं ऐसा चाहेगा। वर्तमान में रूस - यूक्रेेन युद्ध का   कारण भी नाटो ही रहा है।        दूसरा कारण भारत के साथ चीन की तनातनी है भारत क्यों अपने पैर पर कुलड़ी मरेगा। कि चीन - रूस संबंध बढ़े। भारत स्वतंत्रता से गुटनिरपेक्षता का पक्षकार रहा है, और हमेशा से राष्ट्रों के ध्रुवीकरण के खिलाफ रहा है। नाटो के कारण ही शीतयुद्ध झेलना पड़ा था।        भारत एक संप्रभु राष्ट्र है, उसकी एक स्वतंत्र विदेश नीति है नाटो में शामिल होकर अपनी निर्भरता दूसरो पर नहीं थोपेगा।    जहां तक सहयोग की बात है भारत कई संगठन जैसे...