भारत को नाटो प्लस से क्यों दूर रहना चाहिए ?

• NATO PLUS आखिर है क्या?
• भारत को इसमें शामिल क्यों नहीं होना चाहिए!

         NATO PLUS  एक सुरक्षा व्यवस्था है जो 31 NATO सदस्य राष्ट्रों के अतिरिक्त और 5 गठबंधन राष्ट्रो ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, इस्राइल और दक्षिण कोरिया को वैश्विक रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए साथ लाती है।

        भारत NATO PLUS ka सदस्य बनने 
 मतलब रूस के साथ अपने संबंध खराब करना। भारत कभी नहीं ऐसा चाहेगा। वर्तमान में रूस - यूक्रेेन युद्ध का   कारण भी नाटो ही रहा है। 
      दूसरा कारण भारत के साथ चीन की तनातनी है भारत क्यों अपने पैर पर कुलड़ी मरेगा। कि चीन - रूस संबंध बढ़े। भारत स्वतंत्रता से गुटनिरपेक्षता का पक्षकार रहा है, और हमेशा से राष्ट्रों के ध्रुवीकरण के खिलाफ रहा है। नाटो के कारण ही शीतयुद्ध झेलना पड़ा था। 
      भारत एक संप्रभु राष्ट्र है, उसकी एक स्वतंत्र विदेश नीति है नाटो में शामिल होकर अपनी निर्भरता दूसरो पर नहीं थोपेगा। 
  जहां तक सहयोग की बात है भारत कई संगठन जैसे शंघाई सहयोग संगठन (sco), ब्रिक्स और जी-20 का सदस्य भी हैं।

          भारत स्वयं की एक स्वतंत्र विदेश नीति हैं भारत वसुदेव कुटुंबकम की विचार देने वाला देश हैं वह कभी चाहेगा कि भविष्य में राष्ट्रों का बंटवारा हो और ध्रुवीकरण को प्रोत्साहन मिले।

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